इंसान अपने जीवन में सरकार द्वारा प्रदान की गई सेवाओं को करते हुए पता नहीं कितने ही अच्छे कार्यो को करते हुए अपने जीवन पथ पर अग्रसर होता रहता है
उनमे से कुछ लोग उनके द्वारा किए हुए कार्यो से खुश होते है और कुछ उनसे असंतुष्ट भी रहते है
जीवन के अच्छे बुरे कार्यो का लेखा जोखा एक उम्र के साथ (सेवानिवृति के पश्चात) धूमिल पड़ने लगता है ना हम किसी को याद रहते है ना हम किसी को याद करते है
परन्तु किसी दिन आपके के ही द्वारा दी गई शिक्षा से और अगर आपकी सेवा से अपने जीवन में ऊँचाइयों तक पहुँचने वाले आपके ही विद्यार्थी अचानक से मिलते है और जब आपको सारे समाज के
सामने आपकी पहचान बताते है और आपका आदर उसी अध्यापिका की तरह करते है जिन्होंने उन्हें यहाँ तक पहुँचाने में मदद की थी
तब आप अपने आपमें कितना गुरूर और घमण्ड महसूस करते है
उस समय अगर आपके अन्तर्मन में जो पीड़ा और दर्द होगा वह आप कुछ समय के लिए तो भूल ही जाते है सेवा में कार्यरत रहते हुए कितने ही अवार्ड मिले हो परंतु सेवानिवृति के उपरान्त अगर आपको
और आपकी सेवाओं को एक पहचान के साथ सराहा जाता है
सही मायने में यही है आपके सम्मान का अवार्ड
– – लेखिका सुमन लता जी
